वृंदावन सौं बन नहीं, नंदगाम सौं गाम - श्री राम लला जी

वृंदावन सौं बन नहीं, नंदगाम सौं गाम - श्री राम लला जी

वृंदावन सौं बन नहीं, नंदगाम सौं गाम।
बंसीबट सौं बट नहीं, श्याम नाम सौं नाम॥ [1]
श्याम नाम सौं नाम, न श्यामा सी महारानी।
ब्रजबालन सी बाल, न ब्रजबानी सी बानी॥ [2]
'लला' कहैं रससिद्ध, नहीं कहुं गोधन सौं धन।
सकल सिद्धि सम्पन्न धन्य बसुधा वृंदावन॥ [3]

- श्री राम लला जी

वृन्दावन जैसा कोई वन नहीं, नंदगाँव जैसा कोई गाँव नहीं, वंशीवट जैसा कोई वटवृक्ष नहीं, और श्याम नाम जैसा कोई नाम नहीं है। [1]

‘श्याम’ नाम जैसा कोई नाम नहीं, श्यामा (राधा) जैसी कोई महारानी नहीं, ब्रज बाला जैसी कोई कन्या नहीं, और ब्रज भाषा जैसी कोई भाषा नहीं है। [2]

श्री रामलला कहते हैं—“गोधन के समान कोई धन नहीं है। श्री वृन्दावन धाम धन्य है, जो समस्त सिद्धियों से सम्पन्न एवं रस-सिद्ध धाम है।” [3]