तन विच प्राण अटक रहे लागी दर्शन आस - ब्रज के दोहे

तन विच प्राण अटक रहे लागी दर्शन आस - ब्रज के दोहे

तन विच प्राण अटक रहे, लागी दर्शन आस।
क्यों पटकी मँझधार में, राख आपने पास॥

- ब्रज के दोहे
 
मेरे प्राण अब केवल आपके दर्शनों की आशा में ही इस तन में अटके हुए हैं। हे करुणामयी स्वामिनी! आपने मुझे इस संसार रूपी मँझधार में क्यों पटक दिया है? अब मुझ पर कृपा कीजिए और मुझे सदा के लिए अपने चरणों के पास अर्थात् श्री धाम वृन्दावन में ही वास दीजिए।