जाके मन में साँचौ नेह ।
ताकि आस लाड़िली पूजवैं, यामें नहिं संदेह ॥ [1]
दुर्गम बात सुगम दरसावै, ऐसी महा दयाल ।
पुण्यौ के तो आठ दिवस हैं, छिन में करत निहाल ॥ [2]
- श्री किशोरी अलि (रत्न अलि को पत्र-व्यवहार)
जिसके मन में सच्चा प्रेम है उसकी आशा श्री लाड़ली जी [श्री राधा] अवश्य ही पूरी करती हैं, इसमें तो किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं है । [1]
श्री राधा ऐसी परम दयालु हैं कि अति दुर्गम बात भी सहज ही पूर्ण कर देती हैं । श्री किशोरी अलि जी कहते हैं कि पुण्यों का परिणाम तो जीव को उसकी अवधि के अनुसार मिलता है, परंतु श्री लाड़ली जी तो एक क्षण में ही निहाल कर देती हैं । [2]
ताकि आस लाड़िली पूजवैं, यामें नहिं संदेह ॥ [1]
दुर्गम बात सुगम दरसावै, ऐसी महा दयाल ।
पुण्यौ के तो आठ दिवस हैं, छिन में करत निहाल ॥ [2]
- श्री किशोरी अलि (रत्न अलि को पत्र-व्यवहार)
जिसके मन में सच्चा प्रेम है उसकी आशा श्री लाड़ली जी [श्री राधा] अवश्य ही पूरी करती हैं, इसमें तो किसी प्रकार का कोई संदेह नहीं है । [1]
श्री राधा ऐसी परम दयालु हैं कि अति दुर्गम बात भी सहज ही पूर्ण कर देती हैं । श्री किशोरी अलि जी कहते हैं कि पुण्यों का परिणाम तो जीव को उसकी अवधि के अनुसार मिलता है, परंतु श्री लाड़ली जी तो एक क्षण में ही निहाल कर देती हैं । [2]

