श्रीराधारमण लाल कछु दीजे ।
अपनी प्राणप्रिया परिकर की दासीगणना कीजै ॥ [1]
और कछू नहीं चाहों चित में यह बिनती सुनि लीजे ।
श्रीगुणमंजरी के ताते हृदय प्रेम में भीजै ॥ [2]
- श्री गुणमंजरी दास
हे श्री राधारमण लाल, यदि आप मुझे कुछ देना चाहते हैं, तो कृपया मुझे अपनी प्राण प्रिया (श्री राधा) के परिकर की दासी बना दीजिए । [1]
मैं और कुछ नहीं चाहता, इसलिए मेरे हृदय की इस प्रार्थना को सुन लीजिए । श्री गुणमंजरी दास जी कहते हैं कि श्री प्रिया जी के भक्तों की कृपा से मेरा हृदय आपके विशुद्ध प्रेम में भींजता रहे । [2]
अपनी प्राणप्रिया परिकर की दासीगणना कीजै ॥ [1]
और कछू नहीं चाहों चित में यह बिनती सुनि लीजे ।
श्रीगुणमंजरी के ताते हृदय प्रेम में भीजै ॥ [2]
- श्री गुणमंजरी दास
हे श्री राधारमण लाल, यदि आप मुझे कुछ देना चाहते हैं, तो कृपया मुझे अपनी प्राण प्रिया (श्री राधा) के परिकर की दासी बना दीजिए । [1]
मैं और कुछ नहीं चाहता, इसलिए मेरे हृदय की इस प्रार्थना को सुन लीजिए । श्री गुणमंजरी दास जी कहते हैं कि श्री प्रिया जी के भक्तों की कृपा से मेरा हृदय आपके विशुद्ध प्रेम में भींजता रहे । [2]

