(राग केदारो)
नाचत दोउ रास मंडल थई थई तत थई।
प्रेम उमडि रीझि रीझि गावत सुरि थोरी॥ [1]
इक तें इक गति सुढार तान मान सम बिहार।
खेलत रस मै प्रवीन राधिका किसोरी॥ [2]
रुणझुण नूपर बिसाल चलत है जैसी बाल।
छवि देखत भ्रांति मैन मनसा की तोरी॥ [3]
भाँति भाँति करि केल आनंद रस सिंधु झेल।
केवल जुग जुग बिहार वृंदावन जोरी॥ [4]
- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (10)
श्री राधा कृष्ण दोनों मिलकर रास मंडल में ‘थई थई तत थई’ कर प्रेम में उमड़ कर नाच रहे हैं एवं सुंदर सुर में गान कर रहे हैं। [1]
श्री राधिका जू, जो रस में परम निपुण हैं, विहार में उन्मत्त होकर तान, राग इत्यादि सहित नित्य नवीन मनोहर गति लेती हुई प्रेम क्रीड़ा कर रही हैं। [2]
पायल की सुंदर झनकार श्री राधा की चाल का अनुसरण कर रही है जिसकी शोभा देखकर साक्षात कामदेव के हृदय का अभिमान भी टूट रहा है। [3]
दिव्य युगल भाँति भाँति प्रकार से केली कर आनंद के सागर में डुबकी लगा रहे हैं। श्री केवलराम जी कहते हैं, "यह दिव्य दंपत्ति वृन्दावन में युगानुयुग (नित्य निरंतर) से नव-नव नित्य विहार कर रहे हैं।" [4]
नाचत दोउ रास मंडल थई थई तत थई।
प्रेम उमडि रीझि रीझि गावत सुरि थोरी॥ [1]
इक तें इक गति सुढार तान मान सम बिहार।
खेलत रस मै प्रवीन राधिका किसोरी॥ [2]
रुणझुण नूपर बिसाल चलत है जैसी बाल।
छवि देखत भ्रांति मैन मनसा की तोरी॥ [3]
भाँति भाँति करि केल आनंद रस सिंधु झेल।
केवल जुग जुग बिहार वृंदावन जोरी॥ [4]
- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (10)
श्री राधा कृष्ण दोनों मिलकर रास मंडल में ‘थई थई तत थई’ कर प्रेम में उमड़ कर नाच रहे हैं एवं सुंदर सुर में गान कर रहे हैं। [1]
श्री राधिका जू, जो रस में परम निपुण हैं, विहार में उन्मत्त होकर तान, राग इत्यादि सहित नित्य नवीन मनोहर गति लेती हुई प्रेम क्रीड़ा कर रही हैं। [2]
पायल की सुंदर झनकार श्री राधा की चाल का अनुसरण कर रही है जिसकी शोभा देखकर साक्षात कामदेव के हृदय का अभिमान भी टूट रहा है। [3]
दिव्य युगल भाँति भाँति प्रकार से केली कर आनंद के सागर में डुबकी लगा रहे हैं। श्री केवलराम जी कहते हैं, "यह दिव्य दंपत्ति वृन्दावन में युगानुयुग (नित्य निरंतर) से नव-नव नित्य विहार कर रहे हैं।" [4]

