श्री वृंदावन रेणु के, छापे अंगन छाप ।
कदम्ब कुंज तर बैठिकैं, श्यामा श्याम अलाप ॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (195)
श्री वृन्दावन की परम पावन रज (रेणु) को अपने अंगों पर तिलक और छाप की भाँति सुशोभित करके, यमुना तट पर स्थित सघन कदम्ब के कुंजों की शीतल छाया में बैठकर, श्यामा श्याम का प्रेमपूर्वक गान करना चाहिए।
कदम्ब कुंज तर बैठिकैं, श्यामा श्याम अलाप ॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (195)
श्री वृन्दावन की परम पावन रज (रेणु) को अपने अंगों पर तिलक और छाप की भाँति सुशोभित करके, यमुना तट पर स्थित सघन कदम्ब के कुंजों की शीतल छाया में बैठकर, श्यामा श्याम का प्रेमपूर्वक गान करना चाहिए।

