गौर श्याम नित एक रस, नौतन नेह अछेह ।
एक वय क्रम एक मन, एक प्रान द्वै देह ॥
- श्री नागरी दास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (3)
श्री वृंदावन में नित्य विहार में विलीन श्री श्यामा-श्याम एकरस विलसते हैं—एक आयु, एक मन, एक प्राण, पर दो देह।
एक वय क्रम एक मन, एक प्रान द्वै देह ॥
- श्री नागरी दास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, निकुंज विलास (3)
श्री वृंदावन में नित्य विहार में विलीन श्री श्यामा-श्याम एकरस विलसते हैं—एक आयु, एक मन, एक प्राण, पर दो देह।

