कृपा डोरी पकराईकर, तुम खैंचौ जो आप।
अहो रसिक चूड़ामणी, तब मिटिहै संताप॥
- श्री चाचा हित वृंदावन दास, आरत पत्रिका
हे रसिक चूड़ामणि स्वामिनी श्री राधिका, यदि मेरी कृपा की डोरी को स्वयं आप पकड़कर खींचेंगी, तभी मेरे हृदय के संताप मिटेंगे, अन्यथा नहीं।
अहो रसिक चूड़ामणी, तब मिटिहै संताप॥
- श्री चाचा हित वृंदावन दास, आरत पत्रिका
हे रसिक चूड़ामणि स्वामिनी श्री राधिका, यदि मेरी कृपा की डोरी को स्वयं आप पकड़कर खींचेंगी, तभी मेरे हृदय के संताप मिटेंगे, अन्यथा नहीं।

