सखी री मेरो प्यारो है नन्दलाल - श्री भोली गोपी जी

सखी री मेरो प्यारो है नन्दलाल - श्री भोली गोपी जी

सखी री मेरो प्यारो है नन्दलाल,
मोर मुकुट पीताम्बर धारी, घूंघर वाले बाल ।
कर में कंगन मुख पै मुरली, चंचल नयन विशाल ॥ [1]
कानन में मकराकृत कुण्डल, गल वैजन्ती माल ।
छम, छम, छम, छम नूपुर बाजें, अटपट चालें चाल ॥ [2]
अंग-अंग आभूषण सोहे, नन्द यशोदा को लाल ।
भोली गोपी के जीवन घनश्याम, चरण शरण गोपाल ॥ [3]

- श्री भोली गोपी जी

हे सखिरी, मेरे नंदलाल अत्यंत प्यारे हैं जिनके शीश पर मोर मुकुट है, वक्ष स्थल पर पीताम्बर है और जिनके घुंघराले बाल हैं । हाथों में कंगन हैं, होठों पर मुरली, और नैना चंचल एवं विशाल हैं । [1]

कानों में मकराकृत कुण्डल हैं और गले में वैजन्ती माला है । जिनके नुपुर की झंकार से छम छम करती सुंदर ध्वनि आती है और जिनकी चाल अटपटी है। [2]

जिनके अंग अंग पर सुंदर आभूषण जगमगा रहे हैं ऐसे नंद यशोदा के यह लाल हैं। भोली गोपी कहती हैं कि उनके प्राण जीवन धन घनश्याम श्री कृष्ण हैं जिनकी चरणों की शरण में वे रहती हैं । [3]