श्री बिहारीदास ब्रज यौं बसौ, करुवो कामरि ख्यातु ।
जथा लाभ संतोष गहि, ब्रज बासिन कौ भातु ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (486)
हे बिहारीदास! ब्रज में प्रसिद्ध करुवा और कामरी की रहनी से ही बसना चाहिए। ब्रजवासियों के घर से जो टूक-भात मिले, उसी में संतोष रखो।
जथा लाभ संतोष गहि, ब्रज बासिन कौ भातु ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (486)
हे बिहारीदास! ब्रज में प्रसिद्ध करुवा और कामरी की रहनी से ही बसना चाहिए। ब्रजवासियों के घर से जो टूक-भात मिले, उसी में संतोष रखो।

