(राग धनाश्री एवं दरबारी कान्हरा)
श्री राधा नाम रटो सुखकारी ।
श्यामा प्यारी रूप उजारी सखियन की सरदारी ॥ [1]
चंदा बदनी शोभा सदनी छवि पै जाऊँ बलिहारी ।
मोहन मोहन नख सिख सोहन रूप माधुरी वारी ॥ [2]
- श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (127)
सुखकारी “श्री राधा” नाम को रटो । श्री श्यामा प्यारी रूप से उज्जवल हैं और समस्त सखियों की सरदार हैं । [1]
उनका बदन चन्द्र के समान है, वे सुंदरता की खान हैं, जिनकी छवि पर मैं बलिहारी जाता हूँ । सब के चित्त को चुराने वाले मोहन [कृष्ण] के मन का भी हरण करने वाली श्री राधा नख से सिख तक (संपूर्ण स्वरूप) सुहावनी हैं, ऐसी स्वामिनी श्री राधा पर श्री रूप माधुरी स्वयं को न्यौछवार कर रहे हैं । [2]
श्री राधा नाम रटो सुखकारी ।
श्यामा प्यारी रूप उजारी सखियन की सरदारी ॥ [1]
चंदा बदनी शोभा सदनी छवि पै जाऊँ बलिहारी ।
मोहन मोहन नख सिख सोहन रूप माधुरी वारी ॥ [2]
- श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (127)
सुखकारी “श्री राधा” नाम को रटो । श्री श्यामा प्यारी रूप से उज्जवल हैं और समस्त सखियों की सरदार हैं । [1]
उनका बदन चन्द्र के समान है, वे सुंदरता की खान हैं, जिनकी छवि पर मैं बलिहारी जाता हूँ । सब के चित्त को चुराने वाले मोहन [कृष्ण] के मन का भी हरण करने वाली श्री राधा नख से सिख तक (संपूर्ण स्वरूप) सुहावनी हैं, ऐसी स्वामिनी श्री राधा पर श्री रूप माधुरी स्वयं को न्यौछवार कर रहे हैं । [2]

