एक बार जिनि नाम लिये - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, भक्त नामावली (112)

एक बार जिनि नाम लिये - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, भक्त नामावली (112)

एक बार जिनि नाम लिये, हित सौं ह्वै अति दीन ।
ताकौ संग न छाँड़िही, 'ध्रुव' अपनौ करि लीन  ॥

- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, भक्त नामावली (112)

जो एक बार भी दीन होकर प्रेम से श्री हरि का नाम ले लेता है, दयालु हरि उसे कभी नहीं छोड़ते; सदा उसे अपना बना लेते हैं।