जाग्रत सुपने सैन में हिय राधा कौ ध्यान

जाग्रत सुपने सैन में हिय राधा कौ ध्यान

जाग्रत सुपने सैन में हिय राधा कौ ध्यान ।
अंतर-बाहर दिस-विदिस वही रूप मंडरान ॥
- श्री ब्रजजीवन जी

 ब्रजजीवन जी कहते हैं कि जाग्रत, स्वप्न एवं सुषुप्ति में मेरे ह्रदय में श्री राधा का ही ध्यान रहता है । अंदर बाहर, दिन-रात मेरे मन एवं इन्द्रियों में श्री राधा का वही सुन्दर रूप छाया रहता है ।