आज दोऊ भींजत मेघनि माँहिं - गोस्वामी श्री हित राधालाल जी की वाणी (15)

आज दोऊ भींजत मेघनि माँहिं - गोस्वामी श्री हित राधालाल जी की वाणी (15)

(राग मलार)
आज दोऊ भींजत मेघनि माँहिं ।
वृन्दावन की सघन लतनि बिच, ठाढ़े ह्वै-ह्वै जाहिं ॥ [1]
गावत पक्षी मिलि सब ही स्वर, बादर अति घुमड़ाहिं ।
या छवि पर 'हित राधालाल' नें, नैंना लिये छकाहिं ॥ [2]

- गोस्वामी श्री हित राधालाल जी, गोस्वामी श्री हित राधालाल जी की वाणी (15)

आज वृंदावन की घनी लताओं के मध्य ठाढ़े दिव्य युगल (श्री राधा कृष्ण) वर्षा की बूँदों से भीग रहे हैं । [1]

पक्षी मधुर राग में गा रहे हैं, और आकाश में घने बादल गरज रहे हैं। श्री हित राधा लाल के नयनों को इस दिव्य छवि का अवलोकन कर पूर्ण संतुष्टि प्राप्त हुई । [2]