श्यामा श्याम लगन जिहिं लागै - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (40)

श्यामा श्याम लगन जिहिं लागै - श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (40)

(राग झंझोटी)
श्यामा श्याम लगन जिहिं लागै ।
नैनन नीर फुहारे छूटैं मन दम्पति छबि पागै ॥ [1]
हा राधा हा मोहन कहि मुख उठि कुञ्जन कों भागै ।
ललित लड़ैती बस वृन्दावन अनत न कहुँ अनुरागै ॥ [2]

- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, विनय (40)

जिनको दिव्य दंपति श्री श्यामा श्याम की लगन लग जाती है उनकी आखों से आंसुओं की धारा बहती है और वे युगल छवि का निरंतर चिंतन करते हैं । [1]

वे "हा राधा", "हा मोहन" कहकर प्रेम भरी लालसा से कुंजों की ओर दौड़ता है । श्री ललित लड़ैती जी वृंदावन में वास करते हैं क्योंकि उनका अनुराग केवल वृंदावन से ही है । [2]