दिन नहिं भूख, रैन नहीं निद्रा - श्री मीराबाई

दिन नहिं भूख, रैन नहीं निद्रा - श्री मीराबाई

दिन नहिं भूख, रैन नहीं निद्रा, यो तन पल पल छीजै ।
‘मीरा’ के प्रभु गिरिधर नागर, मिलि बिछुरन नहिं दीजै ॥

- श्री मीराबाई

विरह की व्याकुलता में अब न तो दिन में भूख लगती है और न ही रात्रि में निद्रा आती है; यह शरीर विरह की अग्नि में पल-पल क्षीण होता जा रहा है। मीराबाई अपने प्रभु श्री गिरधर लाल से विनय करती हैं कि हे प्रभु! अब मुझ पर कृपा कर दर्शन दीजिए और मिलकर फिर कभी विलग मत होने दीजिएगा।