(सवैया)
दीनौ ब्रजवास हुलास सो मोहि अरु मोहो रहूँ वर वेणुकी तान मैं। [1]
नहायौ करूँ श्री यमुना में अरु कीयौ करूँ यमुना जल पान मैं॥ [2]
'श्री वल्लभ' नाम उचारौ करों, अरु रावरे गायौ करूँ गुनगान मैं। [3]
जबलों प्राण में प्राण रहें तो सामरो रूप रहै आखियान मैं॥ [4]
- श्री वल्लभ दास (पुष्टिमार्गी भक्त)
हे प्रभु! ऐसी कृपा करें कि मुझे ब्रजवास का सौभाग्य उल्लासपूर्वक मिले, जहाँ मैं आपकी रूप-माधुरी का पान करता रहूँ और वंशी की मधुर तान में निरंतर डूबा रहूँ। [1]
मैं श्री यमुना जी में स्नान करूँ और उनके पावन जल का पान करूँ। [2]
सदैव मैं “वल्लभ” नाम का उच्चारण करूँ और आपके गुणों का गान करता रहूँ। [3]
जब तक प्राण रहें, मेरी आँखों के सामने आपका सुंदर सांवला स्वरूप नित्य सजीव बना रहे। [4]
दीनौ ब्रजवास हुलास सो मोहि अरु मोहो रहूँ वर वेणुकी तान मैं। [1]
नहायौ करूँ श्री यमुना में अरु कीयौ करूँ यमुना जल पान मैं॥ [2]
'श्री वल्लभ' नाम उचारौ करों, अरु रावरे गायौ करूँ गुनगान मैं। [3]
जबलों प्राण में प्राण रहें तो सामरो रूप रहै आखियान मैं॥ [4]
- श्री वल्लभ दास (पुष्टिमार्गी भक्त)
हे प्रभु! ऐसी कृपा करें कि मुझे ब्रजवास का सौभाग्य उल्लासपूर्वक मिले, जहाँ मैं आपकी रूप-माधुरी का पान करता रहूँ और वंशी की मधुर तान में निरंतर डूबा रहूँ। [1]
मैं श्री यमुना जी में स्नान करूँ और उनके पावन जल का पान करूँ। [2]
सदैव मैं “वल्लभ” नाम का उच्चारण करूँ और आपके गुणों का गान करता रहूँ। [3]
जब तक प्राण रहें, मेरी आँखों के सामने आपका सुंदर सांवला स्वरूप नित्य सजीव बना रहे। [4]

