भुक्ति मुक्ति चाहत सबै, मोहि न भावति सोइ।
अनुदिन श्री पद रति बढ़ै, जन्म कोटि किन होइ॥
- ब्रज के दोहे
संसार में सभी लोग या तो सांसारिक सुख (भुक्ति) चाहते हैं या मोक्ष (मुक्ति) की कामना करते हैं, परंतु मुझे इनमें से कुछ भी नहीं सुहाता। मेरी तो बस यही एकमात्र अभिलाषा है कि चाहे मेरे करोड़ों जन्म क्यों न हो जाएँ, परंतु श्री राधा महारानी के चरणों में मेरा अनुराग और रति (प्रेम) दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही रहे।
अनुदिन श्री पद रति बढ़ै, जन्म कोटि किन होइ॥
- ब्रज के दोहे
संसार में सभी लोग या तो सांसारिक सुख (भुक्ति) चाहते हैं या मोक्ष (मुक्ति) की कामना करते हैं, परंतु मुझे इनमें से कुछ भी नहीं सुहाता। मेरी तो बस यही एकमात्र अभिलाषा है कि चाहे मेरे करोड़ों जन्म क्यों न हो जाएँ, परंतु श्री राधा महारानी के चरणों में मेरा अनुराग और रति (प्रेम) दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही रहे।

