जाकी माया ते नचे, योगी यती महान ।
नचे सोइ करताल पै, ब्रज वीथिन वनितान ॥
- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (100)
जिसकी माया से बड़े-बड़े योगी एवं मुनींद्र भी नाचते (काँपते) हैं, उसी ब्रह्म श्री कृष्ण को ब्रज में ब्रजांगनाएँ अपने हाथों की तालियों पर नचा रही हैं।
नचे सोइ करताल पै, ब्रज वीथिन वनितान ॥
- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (100)
जिसकी माया से बड़े-बड़े योगी एवं मुनींद्र भी नाचते (काँपते) हैं, उसी ब्रह्म श्री कृष्ण को ब्रज में ब्रजांगनाएँ अपने हाथों की तालियों पर नचा रही हैं।

