सुनहु कृपालु किशोरी ऐसी, आसा कौन पुजैहै ।
तुम बिन कौन कृपानिधि भोरी, बाँह पकरी अपनैहै ॥
- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (419)
हे परम कृपालु किशोरी राधा! मेरी बात सुनिए! मेरी आशा को आपके अतिरिक्त कोई भी पूर्ण नहीं कर सकता है। आपके अतिरिक्त और कौन है जो मेरी बाँह पकड़कर मुझे अपना बना ले।
तुम बिन कौन कृपानिधि भोरी, बाँह पकरी अपनैहै ॥
- श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर (419)
हे परम कृपालु किशोरी राधा! मेरी बात सुनिए! मेरी आशा को आपके अतिरिक्त कोई भी पूर्ण नहीं कर सकता है। आपके अतिरिक्त और कौन है जो मेरी बाँह पकड़कर मुझे अपना बना ले।

