श्रीराधा पद कमल ते, नूपुर कलरव होय।
निर्विकार व्यापक भयो, शब्द ब्रह्म कहि सोय॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सिद्धांत सुख (16)
श्री राधा के चरण कमलों से जो नूपुरों की मधुर ध्वनि (कलरव) प्रकट होती है, वही वास्तव में निर्विकार और सर्वव्यापक 'शब्द ब्रह्म' है। जिसे शास्त्र 'ब्रह्म' कहकर पुकारते हैं, वह वस्तुतः श्री प्रिया जी के चरणों की ही झंकार है।
निर्विकार व्यापक भयो, शब्द ब्रह्म कहि सोय॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सिद्धांत सुख (16)
श्री राधा के चरण कमलों से जो नूपुरों की मधुर ध्वनि (कलरव) प्रकट होती है, वही वास्तव में निर्विकार और सर्वव्यापक 'शब्द ब्रह्म' है। जिसे शास्त्र 'ब्रह्म' कहकर पुकारते हैं, वह वस्तुतः श्री प्रिया जी के चरणों की ही झंकार है।

