हाथ हमारे सब कछू, दियौ बिहारिनी बाल ।
अंग संग निरखें केलि सुख, अद्भुत प्रेम विसाल ॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (645)
श्री कुंजबिहारिनी जू (श्री राधा) ने हमें सब कुछ प्रदान किया है। वे सदा हमारे अंग-संग रहती हैं और नित्य-विहार की सर्वोच्च केली का प्रेम-रस निरंतर प्रदान करती हैं।
अंग संग निरखें केलि सुख, अद्भुत प्रेम विसाल ॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (645)
श्री कुंजबिहारिनी जू (श्री राधा) ने हमें सब कुछ प्रदान किया है। वे सदा हमारे अंग-संग रहती हैं और नित्य-विहार की सर्वोच्च केली का प्रेम-रस निरंतर प्रदान करती हैं।

