राधाया च कृता केलि - सनत्कुमार संहिता (32.7 - 32.11)

राधाया च कृता केलि - सनत्कुमार संहिता (32.7 - 32.11)

राधाया च कृता केलिः श्रीकृष्णेन समं शुभा । ततः प्राप्य सखी श्रेष्ठा ललिता वाक्यम् ब्रव्रीत् ॥
युवयोर्वक्त संजाताः केलि श्रम कणाः शुभा । अतः संजायते नूनं तटिनी कापि चोत्तमा ॥
सर्वः सखी गणै पेयं त्वं प्रसीद कुरुष्व च । इदमेव परं पुण्यं युवयोः केलिजं जलम् ॥
तस्यास्तद्वाक्यमाकर्ण्य सा चकार नहीं बराम ॥

- सनत्कुमार संहिता (32.7 - 32.11)

(यमुना प्रकट लीला)
एक समय श्रीप्रियाजू ने श्री लाल जू के साथ परम पवित्र सुरति केलि की जिससे उनके मुखारविंद पर स्वेद विन्दु आये उनको देखकर सखियों में श्रेष्ठ श्रीललिता जी कहने लगी:
आप दोनों के लीला विलास के श्रम से जो, मुखारविंद में परम पवित्र श्रम कण आये हैं निश्चय इनसे कोई उत्तमा नदी प्रकट होनी चाहिये उसके जल को हम सब सखी पान करेंगी। आप प्रसन्न होकर इनसे एक नदी निर्माण करिये। आपका जो लीला विलास का श्रम जल है यह परम पवित्र है। इस प्रकार श्रीललिता जी के वाक्य सुन कर श्री युगल ने परम पवित्र नदी श्रीयमुना जी को प्रकट किया।