जिन मोरनके पंख हरि, राखत अपने शीश।
तिनके भागनकी सखी, कौन करिसकै रीश॥
- ब्रज के दोहे
हे सखी! जिन मोरों के पंख श्री हरि ने अपने शीश पर धारण किए हैं, उनके भाग्य की तुलना भला कौन कर सकता है?
तिनके भागनकी सखी, कौन करिसकै रीश॥
- ब्रज के दोहे
हे सखी! जिन मोरों के पंख श्री हरि ने अपने शीश पर धारण किए हैं, उनके भाग्य की तुलना भला कौन कर सकता है?

