भजन न कीनों मैं कछू, जानत नाहिन जोग - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (91)

भजन न कीनों मैं कछू, जानत नाहिन जोग - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (91)

भजन न कीनों मैं कछू, जानत नाहिन जोग ।
श्री स्वामी की कृपा बल, सहज संयोगी भोग ॥

- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (91)

न तो मैंने कोई भजन किया है और न ही मुझे योग आदि का ज्ञान है । मुझे तो केवल रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास जी की अहैतुकी कृपा का ही बल है, जिसके प्रभाव से मैंने सहज ही नित्य-विहार-रस का आस्वादन कर लिया है।