‘रा’ अक्षर श्रीगौरतन ‘धा’ अक्षर घनश्याम - श्री लाड़लीदास, सुधर्म बोधिनी (4.2)

‘रा’ अक्षर श्रीगौरतन ‘धा’ अक्षर घनश्याम - श्री लाड़लीदास, सुधर्म बोधिनी (4.2)

‘रा’ अक्षर श्रीगौरतन, ‘धा’ अक्षर घनश्याम।
सहज परस्पर आत्मरति, विधि मिली राधा नाम॥

- श्री लाड़लीदास, सुधर्म बोधिनी (4.2)

‘राधा’ नाम के गूढ़ रहस्य को प्रकट करते हुए श्री लाड़लीदास कहते हैं कि ‘रा’ अक्षर साक्षात् श्री गौरवर्णा श्री प्रिया जी (राधा रानी) का स्वरूप है और ‘धा’ अक्षर स्वयं श्यामवर्ण घनश्याम (श्री कृष्ण) का प्रतीक है। इन दोनों स्वरूपों की सहज और परस्पर अटूट प्रीति ही ‘राधा’ नाम में समाहित है, जो वास्तव में एक ही प्राण और दो देह का साक्षात् मिलन है।