रस औ लुनाई की सार है नवेली बाल,
सुख की है सार करुना हू की सार है। [1]
शोभा छवि रूप माधुरी की है सार बाल,
परम प्रवीन अति चातुरी की सार है॥ [2]
नागर के संग रस रंग की विलास सार,
केलि कौ प्रकास हाव भाव गति सार है। [3]
ताही के चरन माहिं मेरो मन बसौ नित्त,
राधा जाको नाम सब सारन की सार है॥ [4]
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (25)
जो लावण्य एवं रस की सार हैं। जो करुणा एवं सुख की सार हैं। [1]
जो मधुर छवि एवं रूप माधुरी की सार हैं। जो परम प्रवीण एवं चतुरता की सार हैं। [2]
जो लाल जी के संग प्रेम-क्रीडा विलास की सार हैं। जो केली प्रकाशक हाव भाव एवं गति की सार हैं। [3]
ऐसी स्वामिनी जो समस्त सारों की सार हैं जिनका नाम राधा है, उनके चरणों में ही मेरा मन नित्य वास करे। [4]
सुख की है सार करुना हू की सार है। [1]
शोभा छवि रूप माधुरी की है सार बाल,
परम प्रवीन अति चातुरी की सार है॥ [2]
नागर के संग रस रंग की विलास सार,
केलि कौ प्रकास हाव भाव गति सार है। [3]
ताही के चरन माहिं मेरो मन बसौ नित्त,
राधा जाको नाम सब सारन की सार है॥ [4]
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (25)
जो लावण्य एवं रस की सार हैं। जो करुणा एवं सुख की सार हैं। [1]
जो मधुर छवि एवं रूप माधुरी की सार हैं। जो परम प्रवीण एवं चतुरता की सार हैं। [2]
जो लाल जी के संग प्रेम-क्रीडा विलास की सार हैं। जो केली प्रकाशक हाव भाव एवं गति की सार हैं। [3]
ऐसी स्वामिनी जो समस्त सारों की सार हैं जिनका नाम राधा है, उनके चरणों में ही मेरा मन नित्य वास करे। [4]

