काल डरै, जमराज डरै, तिहुँ लोक डरै, न करै कछु बाधा।
रच्छक चक्र फिरै ता ऊपर, जो नर भूलि उचारै राधा ॥
- ब्रज के दोहे
“राधा” नाम की महिमा इतनी अपार है कि जिस क्षण मनुष्य भूल से भी “राधा” नाम का उच्चारण कर लेता है, उसी क्षण काल और यमराज भी उससे भयभीत हो जाते हैं। तीनों लोकों की कोई भी शक्ति उस समय उसे बाधा नहीं पहुँचा सकती, क्योंकि भगवान का सुदर्शन चक्र उस भक्त की रक्षा के लिए उसके ऊपर विचरण करता रहता है।
रच्छक चक्र फिरै ता ऊपर, जो नर भूलि उचारै राधा ॥
- ब्रज के दोहे
“राधा” नाम की महिमा इतनी अपार है कि जिस क्षण मनुष्य भूल से भी “राधा” नाम का उच्चारण कर लेता है, उसी क्षण काल और यमराज भी उससे भयभीत हो जाते हैं। तीनों लोकों की कोई भी शक्ति उस समय उसे बाधा नहीं पहुँचा सकती, क्योंकि भगवान का सुदर्शन चक्र उस भक्त की रक्षा के लिए उसके ऊपर विचरण करता रहता है।

