श्रीमद्वृन्दावनेश्वर्य्या: सकृन्नामैक मंगलम् ।
सर्वाश्चर्यानन्त शक्तिमुखे विजयतां मम् ॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (17.126)
श्रीमद्वृन्दावनेश्वरी (श्रीराधा) का एक बार ही श्रीराधा-नाम लेने से समस्त मंगल प्राप्त होते हैं, एवं समस्त अनन्त शक्तियों का विकास होता है। वह श्रीराधा-नाम सदा मेरी जिह्वा पर जय युक्त होकर विराजमान् रहे ।
सर्वाश्चर्यानन्त शक्तिमुखे विजयतां मम् ॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (17.126)
श्रीमद्वृन्दावनेश्वरी (श्रीराधा) का एक बार ही श्रीराधा-नाम लेने से समस्त मंगल प्राप्त होते हैं, एवं समस्त अनन्त शक्तियों का विकास होता है। वह श्रीराधा-नाम सदा मेरी जिह्वा पर जय युक्त होकर विराजमान् रहे ।

