बाँके आसन बाँके सिंघासन - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

बाँके आसन बाँके सिंघासन - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

(राग टोडी)
बाँके आसन बाँके सिंघासन, बाँके तकियन की छबि न्यारी।
बाँके रास विलास बने, बाँकी बनी राधा जू प्यारी॥ [1]
बाँके मन्दिर कंचन के अरु, बाँकी बनी व्रज की व्रजनारी।
गोविन्द नैना ताकि रहै झुकि, झाँके झरोखा में बाँकेबिहारी॥ [2]

- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

श्री बाँके बिहारी का आसन और सिंहासन बाँका है, और बाँके तकियों की छवि भी अत्यंत सुंदर है। [1]

उनका रास और विलास भी बाँका है, और श्री राधा जू भी बाँकी हैं। [2]

उनके कंचन रंग के मंदिर भी बाँके हैं, और समस्त ब्रज की युवतियाँ भी बाँकी हैं। [3]

श्री गोविंददास कहते हैं—“जब ब्रज की युवतियाँ बाँके बिहारी को अपनी बाँकी आँखों से निहारती हैं, तो वे एक झरोके का सहारा लेकर अपनी दृष्टि को पूर्ण रूप से बाँके बिहारी पर ही टिका देती हैं।” [4]