जहाँ राधा राधा गावें तहां सुनवे कों हम धावें - ब्रज के सवैया

जहाँ राधा राधा गावें तहां सुनवे कों हम धावें - ब्रज के सवैया

जहाँ राधा राधा गावें। तहां सुनवे कों हम धावें॥ [1]
जहाँ राधा चरचा कीजे। तहाँ प्रथम जान मोहि लीजे॥ [2]
श्रीराधा मेरी संपति। श्री राधा मेरी दंपति॥ [3]
सुंदर वृषभान दुलारी। मेरे हिय ते होत न न्यारी॥ [4]

- ब्रज के सवैया

श्रीकृष्ण कहते हैं — 
जहाँ भी ‘श्री राधा-राधा’ नाम गाया जाता है, मैं उस स्थान पर राधा नाम सुनने के लिए दौड़ पड़ता हूँ। [1]

जहाँ भी श्री राधा की चर्चा होती है, वहाँ मैं पहले से ही निवास करता हूँ। [2]

श्री राधा मेरी संपूर्ण संपत्ति हैं, और वे ही मेरी प्रिय दंपति हैं। [3]

मेरा हृदय वृषभानु-नंदिनी श्री राधा को एक क्षण के लिए भी नहीं भूल सकता। [4]