गौरीसुत नहिं गा सकै, नहीं शारदा वाम।
'चरणदास' कह बुद्धि है, वरणि सके निज धाम॥
- श्री चरण दास, भक्तिसागर
प्रिया-प्रियतम के निज धाम वृंदावन की महिमा का वर्णन गणेश जी एवं ब्रह्मा जी भी नहीं कर सकते, तो भला ऐसा कौन-सा बुद्धिजीवी है जो श्री वृंदावन धाम का वर्णन करने में समर्थ हो (अर्थात् कोई नहीं)।
'चरणदास' कह बुद्धि है, वरणि सके निज धाम॥
- श्री चरण दास, भक्तिसागर
प्रिया-प्रियतम के निज धाम वृंदावन की महिमा का वर्णन गणेश जी एवं ब्रह्मा जी भी नहीं कर सकते, तो भला ऐसा कौन-सा बुद्धिजीवी है जो श्री वृंदावन धाम का वर्णन करने में समर्थ हो (अर्थात् कोई नहीं)।

