विपिन वर राज विहारिनि राजै ।
टहल महल नित करत विहारी कृपा विलोकनि काजै ॥ [1]
नव सत साज सिंगार बार दृग अलिगन सैना साजै ।
(जै श्री) रूपलाल हित नवल त्रिभंगी सफल मनोरथ आजै ॥ [2]
- श्री हित रूपलाल जी
सर्वोकृष्ट श्री वृंदावन धाम पर विराज रही श्री कुंज बिहारिनी श्री राधिका का ही राज है जहां श्री कुंज बिहारी (कृष्ण) राधा रानी की इस आशा से सेवा करते हैं कि श्री बिहारिनी (राधा) जी उनपर भी कृपा की दृष्टि डालेंगीं । [1]
श्री वृंदावन धाम में जहां सखियों की विशाल सेना (समूह) सज रही है वहीं श्री प्यारी जू सोलह श्रृंगार में सजी हैं जिसे निहार कर वे अपने नेत्रों को बारंबार न्यौछवार कर रहे हैं । श्री हित रूप लाल जी कहते हैं कि नवल त्रिभंगी लाल (कृष्ण) की मानो आज समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण हो रही हैं । [2]
टहल महल नित करत विहारी कृपा विलोकनि काजै ॥ [1]
नव सत साज सिंगार बार दृग अलिगन सैना साजै ।
(जै श्री) रूपलाल हित नवल त्रिभंगी सफल मनोरथ आजै ॥ [2]
- श्री हित रूपलाल जी
सर्वोकृष्ट श्री वृंदावन धाम पर विराज रही श्री कुंज बिहारिनी श्री राधिका का ही राज है जहां श्री कुंज बिहारी (कृष्ण) राधा रानी की इस आशा से सेवा करते हैं कि श्री बिहारिनी (राधा) जी उनपर भी कृपा की दृष्टि डालेंगीं । [1]
श्री वृंदावन धाम में जहां सखियों की विशाल सेना (समूह) सज रही है वहीं श्री प्यारी जू सोलह श्रृंगार में सजी हैं जिसे निहार कर वे अपने नेत्रों को बारंबार न्यौछवार कर रहे हैं । श्री हित रूप लाल जी कहते हैं कि नवल त्रिभंगी लाल (कृष्ण) की मानो आज समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण हो रही हैं । [2]

