जम की मार बुरी अहै, छुटै न और उपाइ ।
दृढ़ करिकै हरि भक्ति ह्वै, तब हरि भक्त सहाइ ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (75)
यमराज का दण्ड (मृत्यु और नरक का कष्ट) अत्यंत भयानक है, जिससे बचने का संसार में अन्य कोई उपाय नहीं है। यदि कोई जीव दृढ़तापूर्वक श्री हरि की भक्ति को अपना लेता है, तब भगवान स्वयं अपने भक्त की सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं और उसे यम के भय से मुक्त कर देते हैं।
दृढ़ करिकै हरि भक्ति ह्वै, तब हरि भक्त सहाइ ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (75)
यमराज का दण्ड (मृत्यु और नरक का कष्ट) अत्यंत भयानक है, जिससे बचने का संसार में अन्य कोई उपाय नहीं है। यदि कोई जीव दृढ़तापूर्वक श्री हरि की भक्ति को अपना लेता है, तब भगवान स्वयं अपने भक्त की सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं और उसे यम के भय से मुक्त कर देते हैं।

