(राग विहागरौ)
छबीली छबि सौं रँगीले दोउ, राजत जमुना-तीर ।
अंग-अंग भूषण प्रतिबिंबित, स्यामल-गौर सरीर ॥ [1]
गावत मोर, मराल, भॅवर, पिक, संग सखिनु की भीर ।
'हित ध्रुव' रूप माधुरी निरखत, ह्वै गये सबै अधीर ॥ [2]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (57)
सुहावनी छवि से युक्त रंगीले युगल यमुना तट पर विराजमान हैं । उनके युगल-गौर तनु पर अंग-अंग के भूषण प्रतिबिम्भित हैं । [1]
साथ में सखियों के समूह हैं और श्रीवन के मयूर, राजहंस, भ्रमर,एवं कोयल आदि पक्षी गान परायण हैं । श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि युगल प्रियतम की रूप-माधुरी का अवलोकन करके सखियों सहित सभी खग-मृग मोहित हो रहे हैं । [2]
छबीली छबि सौं रँगीले दोउ, राजत जमुना-तीर ।
अंग-अंग भूषण प्रतिबिंबित, स्यामल-गौर सरीर ॥ [1]
गावत मोर, मराल, भॅवर, पिक, संग सखिनु की भीर ।
'हित ध्रुव' रूप माधुरी निरखत, ह्वै गये सबै अधीर ॥ [2]
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (57)
सुहावनी छवि से युक्त रंगीले युगल यमुना तट पर विराजमान हैं । उनके युगल-गौर तनु पर अंग-अंग के भूषण प्रतिबिम्भित हैं । [1]
साथ में सखियों के समूह हैं और श्रीवन के मयूर, राजहंस, भ्रमर,एवं कोयल आदि पक्षी गान परायण हैं । श्री हित ध्रुवदास जी कहते हैं कि युगल प्रियतम की रूप-माधुरी का अवलोकन करके सखियों सहित सभी खग-मृग मोहित हो रहे हैं । [2]

