कुंज कुंज निरखत फिरूँ, जमुना जल में नहाऊँ ।
श्रीवृंदावन छाँड़ि कें, अनत न कितहूँ जाऊँ ॥
- श्री दामोदर दास
मैं वृंदावन की प्रत्येक कुंज का दर्शन करूँ और यमुना-जल में स्नान करूँ; इस धाम को छोड़कर एक क्षण भी अन्यत्र न जाऊँ।
श्रीवृंदावन छाँड़ि कें, अनत न कितहूँ जाऊँ ॥
- श्री दामोदर दास
मैं वृंदावन की प्रत्येक कुंज का दर्शन करूँ और यमुना-जल में स्नान करूँ; इस धाम को छोड़कर एक क्षण भी अन्यत्र न जाऊँ।

