तुम पौढो, हौं सेज वनाऊं - श्री आसकरन जी

तुम पौढो, हौं सेज वनाऊं - श्री आसकरन जी

(राग केदारो)
तुम पौढो, हौं सेज बनाऊं।
चाँपों चरन रहों पाटीतर, मधुरे सुर केदारो गाऊं ॥ [1]
सहचरी चतुर सबै जुरि आई, दंपति सुख नैननि दरसाऊं ।
'आसकरन’ प्रभु मोहन नागर, यह सुख स्याम सदा हौं पाऊं ॥ [2]

- श्री आसकरन जी

हे श्यामा श्याम, मैं सुंदर सेज बनाया करूँ और तुम दोनों उसमें पौढ़ा करो । उसके बाद मैं तुम्हारे चरणों को (सिंहासन के संग रहकर) प्रेम से दबाया करूँ, और मधुर स्वर में राग केदारो गाया करूँ । [1]

उसके बाद समस्त सहचरियाँ एक संग एकत्र होकर दिव्य दंपति (श्री राधा कृष्ण) को अपने नैनों से निहारने का सुख प्राप्त करा करेंगीं । श्री आसकरन जी कहते हैं कि हे मोहन नागर श्री श्याम सुंदर, कृपा कर मुझे यह सुख सदा प्रदान करना । [2]