एक बार जो लेय, राधा आधा नाम को - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्रीनिकुञ्ज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (40)

एक बार जो लेय, राधा आधा नाम को - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्रीनिकुञ्ज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (40)

एक बार जो लेय, राधा आधा नाम को ।
रीझी अपनपौ देय, ताको मोहन साँवरो ॥

- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्रीनिकुञ्ज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (40)

श्री राधा नाम की ऐसी अद्भुत महिमा है कि यदि कोई एक बार भी प्रेमपूर्वक श्री राधा का आधा नाम अर्थात् “रा” का ही उच्चारण करता है, तो श्यामसुंदर इतने प्रसन्न हो जाते हैं कि उसे स्वयं को ही दे देते हैं।