यह नैना रिझवार नये री -  श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, युगल छदम लीला (10)

यह नैना रिझवार नये री - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, युगल छदम लीला (10)

(राग काफी)
यह नैना रिझवार नये री ।
एक बेर लखि रूप लाल को, तजि घरबार फकीर भये री ॥ [1]
अब देखे बिन डारत आँसू, युग समान पल बीति गये री ।
नारायण येहू अति चंचल, फल पाये जो बीज बये री ॥ [2]

- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, युगल छदम लीला (10)

यह नैना श्री श्यामसुन्दर का एक बार ही रूप निहार कर नित्य रिझवार हो गये हैं जिसका ऐसा प्रभाव पड़ा है कि घर बार का स्वतः ही त्याग होगया और एक फ़क़ीर बन गये हैं । [1]

अब यह नैना श्री लाल जी के रूप को देखे बिना आँसु बहाया कर रहे हैं और एक एक क्षण युगों के समान प्रतीत हो रहा है । श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि अब यह अति चंचल बने हुए हैं और वही फल पा रहे हैं जो बीज बोया है । [2]