नमो-नमो वृन्दावन रानी ।
रसिक किशोर लाल प्रीतम की, महारानी सुखदानी ॥ [1]
परम उदार कृपालु छबीली, नव निकुंज रस सानी ।
नवल किशोरी गोरी भोरी, सकल कला गुन खानी ॥ [2]
सरनागत प्रतिपाल दयामयि, रसिकनि हित प्रगटानी।
आगम निगम पुरान अगोचर, श्रीहरिवंश बखानी ॥ [3]
रसिकसिरोमनिलाल-कृपा बिनु, बात जाति नहिं जानी।
'नेहलता हित' प्यारी मोकौं, करौ दासि मन-मानी ॥ [4]
- श्री हित नेहलता जी
वृंदावन की महारानी श्री राधा की जय हो, जो रसिक किशोरी श्री लाल जी की प्रीतम हैं, जो ऐसी महारानी हैं जो सदा सुखदानी हैं । [1]
श्री राधा परम उदार एवं कृपालु स्वामिनी हैं जिनकी छवि सुंदर है एवं नित्य नव निकुंज रस से सराबोर है । वे नवल किशोरी हैं, गोरे रंग वाली हैं और अत्यंत भोली हैं जो सकल कलाओं और गुणों की खान हैं । [2]
श्री राधा शरणागत जीवों की सदा रक्षा करने वाली हैं, दया की सागर हैं और रसिक संतों के हित (प्रेम देने) के लिए ही प्रकट हुई हैं । श्री राधा वेदों, शास्त्रों और पुराणों से परे हैं जिनका गुणगान रसिक संत श्री हरिवंश महाप्रभु ने बखान किया है । [3]
रसिकों शिरोमणि श्री कृष्ण की अहैतु की कृपा से ही कोई जीव श्री राधा की महिमा का अनुभव कर सकता है। श्री हित नेहलाता जी प्रार्थना करती हैं, "हे राधिका प्यारी, कृपया मुझे मनमानी दासता प्रदान करें"। [4]
रसिक किशोर लाल प्रीतम की, महारानी सुखदानी ॥ [1]
परम उदार कृपालु छबीली, नव निकुंज रस सानी ।
नवल किशोरी गोरी भोरी, सकल कला गुन खानी ॥ [2]
सरनागत प्रतिपाल दयामयि, रसिकनि हित प्रगटानी।
आगम निगम पुरान अगोचर, श्रीहरिवंश बखानी ॥ [3]
रसिकसिरोमनिलाल-कृपा बिनु, बात जाति नहिं जानी।
'नेहलता हित' प्यारी मोकौं, करौ दासि मन-मानी ॥ [4]
- श्री हित नेहलता जी
वृंदावन की महारानी श्री राधा की जय हो, जो रसिक किशोरी श्री लाल जी की प्रीतम हैं, जो ऐसी महारानी हैं जो सदा सुखदानी हैं । [1]
श्री राधा परम उदार एवं कृपालु स्वामिनी हैं जिनकी छवि सुंदर है एवं नित्य नव निकुंज रस से सराबोर है । वे नवल किशोरी हैं, गोरे रंग वाली हैं और अत्यंत भोली हैं जो सकल कलाओं और गुणों की खान हैं । [2]
श्री राधा शरणागत जीवों की सदा रक्षा करने वाली हैं, दया की सागर हैं और रसिक संतों के हित (प्रेम देने) के लिए ही प्रकट हुई हैं । श्री राधा वेदों, शास्त्रों और पुराणों से परे हैं जिनका गुणगान रसिक संत श्री हरिवंश महाप्रभु ने बखान किया है । [3]
रसिकों शिरोमणि श्री कृष्ण की अहैतु की कृपा से ही कोई जीव श्री राधा की महिमा का अनुभव कर सकता है। श्री हित नेहलाता जी प्रार्थना करती हैं, "हे राधिका प्यारी, कृपया मुझे मनमानी दासता प्रदान करें"। [4]

