प्रीतम भक्ति तें बस कीनों -  श्री छीत स्वामी (अष्टछाप कवि)

प्रीतम भक्ति तें बस कीनों - श्री छीत स्वामी (अष्टछाप कवि)

(राग नट)
प्रीतम भक्ति तें बस कीनों ।
उर-अंतर ते स्याम मनोहर नेंकहु जान न दीनों ॥ [1]
सहि नहिं सकति बिछुरनो पल भरि भलौ नेम यह लीनों ।
‘छीत-स्वामी’ गिरिधरन श्री विट्ठल भक्ति-कृपा-रस भीनों ॥ [2]

- श्री छीत स्वामी

प्रीतम (श्री कृष्ण) को भक्ति से ही वश में किया जा सकता है । अपने ह्रदय से मनोहर श्याम को एक क्षण को भी नहीं भूलना चाहिए । [1]

इस प्रकार का नियम लेना चाहिए कि मैं एक पल का वियोग भी गिरिधर लाल का नहीं सहूँगा । श्री छीत स्वामी स्वामी जी कहते हैं कि श्री गिरिधर एवं श्री विट्ठल नाथ जी की कृपा से मैं भक्ति रस में डूबा हुआ हूँ । [2]