(राग कान्हरो)
कौन रसिक है इन बातनि कौ।
नंदनंदन बिनु कासों कहिए
सुनिरी सखी मेरे दुःख या तन कौ॥ [1]
कहाँ वह जमुना पुलिन मनोहर
कहाँ वह चंद सरद-रातनि कौ॥ [2]
कहाँ वह सेज पौढिबौ बन कौ
फूल बिछौना मृदु पातनि कौ। [3]
कहाँ वह मंद-सुगंध अनिल-रस
कहाँ वह षटपद जल-जातनि कौ। [4]
कहाँ वह दरस परस 'परमानंद'
कमलनैन कोमल गातनि कौ॥ [5]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (1001)
ऐसा कौन रसिक है जो इन बातों को समझ सकेगा; हे सखी, रसिक शिरोमणि नंदनंदन (कृष्ण) के अतिरिक्त ऐसा कौन है जो मेरे तन के दुखों (वियोग) को समझ सकता है ? [1]
श्री यमुना जी का वह मनोहर पुलिन कहाँ है ? शरद ऋतु की वह चांदनी रातें कहाँ हैं ? [2]
वन में सुंदर पौढ़ने वाली शैया कहाँ है जिसे मृदुल फूलों एवं पत्तों से सजाया जाता था ? [3]
मंद गति से बहनेवाली वह सुगन्धयुक्त पवन कहाँ है ? जल में खिले हुए कमल पुष्पों पर मँडराते हुए भँवरे कहाँ हैं ? [4]
श्री परमानंद दास जी कहते हैं कि अब कहाँ है वे कमल नयन वाले श्याम सुंदर के मधुर दर्शन एवं उनके कोमल आलिंगन का सुख जो हमें मिला करता था ? [5]
कौन रसिक है इन बातनि कौ।
नंदनंदन बिनु कासों कहिए
सुनिरी सखी मेरे दुःख या तन कौ॥ [1]
कहाँ वह जमुना पुलिन मनोहर
कहाँ वह चंद सरद-रातनि कौ॥ [2]
कहाँ वह सेज पौढिबौ बन कौ
फूल बिछौना मृदु पातनि कौ। [3]
कहाँ वह मंद-सुगंध अनिल-रस
कहाँ वह षटपद जल-जातनि कौ। [4]
कहाँ वह दरस परस 'परमानंद'
कमलनैन कोमल गातनि कौ॥ [5]
- श्री परमानन्द दास, परमानंद सागर (1001)
ऐसा कौन रसिक है जो इन बातों को समझ सकेगा; हे सखी, रसिक शिरोमणि नंदनंदन (कृष्ण) के अतिरिक्त ऐसा कौन है जो मेरे तन के दुखों (वियोग) को समझ सकता है ? [1]
श्री यमुना जी का वह मनोहर पुलिन कहाँ है ? शरद ऋतु की वह चांदनी रातें कहाँ हैं ? [2]
वन में सुंदर पौढ़ने वाली शैया कहाँ है जिसे मृदुल फूलों एवं पत्तों से सजाया जाता था ? [3]
मंद गति से बहनेवाली वह सुगन्धयुक्त पवन कहाँ है ? जल में खिले हुए कमल पुष्पों पर मँडराते हुए भँवरे कहाँ हैं ? [4]
श्री परमानंद दास जी कहते हैं कि अब कहाँ है वे कमल नयन वाले श्याम सुंदर के मधुर दर्शन एवं उनके कोमल आलिंगन का सुख जो हमें मिला करता था ? [5]

