प्रगट करी व्रज भूमि मधि, श्री वृंदावन धाम ।
ताकि छवि कवि कही थके, सब जन मन अभिराम ॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (3)
श्री प्रिया-प्रियतम ने ब्रज-भूमि के मध्य श्री वृंदावन धाम को प्रकट किया। इसके गुणों का वर्णन करते-करते रसिक संत भी थक जाते हैं, क्योंकि यह धाम सबके मन को मोहित कर लेता है।
ताकि छवि कवि कही थके, सब जन मन अभिराम ॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (3)
श्री प्रिया-प्रियतम ने ब्रज-भूमि के मध्य श्री वृंदावन धाम को प्रकट किया। इसके गुणों का वर्णन करते-करते रसिक संत भी थक जाते हैं, क्योंकि यह धाम सबके मन को मोहित कर लेता है।

