हम याही भरोसे निर्भय भए -  श्री किशोरी अलि

हम याही भरोसे निर्भय भए - श्री किशोरी अलि

हम याही भरोसे निर्भय भए ।
करुना- सिंधु कृपाल लाड़िली औगुन तजि निज करि लए ॥ [1]
स्वामिनि चरन कमल सेए विन जनम अनेक वृथा गए ।
बंसी अलि अपनाइ किसोरी दुर्लभ रस हिय भरि दए ॥ [2]

- श्री किशोरी अलि

हम इसी भरोसे पर तो निर्भय हुए हैं कि हमारी लाड़ली जू (राधा ) परम कृपाल एवं करुणा सिंधु हैं जिन्होंने हमारे अवगुणों को बिना विचार किये ही हमारे हाथों को पकड़ रखा है (अर्थात् अपना रखा है) । [1]

ऐसी अद्भुत स्वामिनी (राधिका) के चरणकमलों की सेवा से वंचित रहने के कारण हमारे अनेक जन्म व्यर्थ चले गए । श्री किशोरी अलि जी कहते हैं कि श्री वंशी अलि ने हमें अपना लिया और श्री किशोरिजी जी ने हमारे ह्रदय को अति दुर्लभ रस से ओतप्रोत कर दिया । [2]