चतुर चिंता ना करै, उमँगि उमँगि गुन गाइ -  श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (40)

चतुर चिंता ना करै, उमँगि उमँगि गुन गाइ - श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (40)

चतुर चिंता ना करै, उमँगि उमँगि गुन गाइ ।
जान हार रहि है नहीं, आवान हार न जाइ ॥

- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (40)

जो कुछ होना है, वह अवश्य होगा, और जो नहीं होना है, वह नहीं होगा। चतुर व्यक्ति इस तथ्य को जानता है, अतः वह किसी की चिंता न करते हुए परम उल्लसित होकर श्री प्रिया प्रियतम का नित्य गुणगान करता रहता है।