मनमोहना रसमत्त पियारों - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (128.1)

मनमोहना रसमत्त पियारों - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (128.1)

मनमोहना रसमत्त पियारों, छाँड़ि सकल कुल लाज ।
जस अपजस कोऊ कहो, मोहि नाहिंन काहू सों काज ॥

- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (128.1)
    
मनमोहन के रस में मतवाला होकर मैंने लोक-लाज और कुल की मर्यादा का पूर्णतः त्याग कर दिया है। अब कोई यश करे या अपयश—मुझे किसी की परवाह नहीं।