या वृंदावन की बानिक याही पै बनि आवै ।
यह जमुना यह पुलिन मनोहर
यह बंसीबट जहां मोहन बेन बजावै ॥ [1]
यह तरु सघन भूमि हरियारी
ये मृग मृगी पंछिन की श्रवण सुहावै ।
‘ब्रजनिधि’ यह राधा कौ बाग सोही बड़भाग
जो या सों अनुराग करि याही के गुन गावै ॥ [2]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (112)
श्री वृंदावन धाम की समानता केवल वृंदावन धाम ही कर सकता है जहां यमुना का मनोहर पुलिन है, जहां सुंदर वंशीवट है जहां श्री कृष्ण ने मुरली बजाई थी । [1]
जहां के वृक्ष सघन हैं एवं भूमि में हरियाली छाई हुई है जहां के मृग पक्षी आदि मधुर ध्वनि करते हैं । श्री ब्रजनिधि जी कहते हैं कि यह वृंदावन तो श्री राधा का ही बाग है, अत: वही बड़भागी जीव केवल वही है जो वृंदावन से अनुराग करता है और वृंदावन का ही गुणगान करता है । [2]
यह जमुना यह पुलिन मनोहर
यह बंसीबट जहां मोहन बेन बजावै ॥ [1]
यह तरु सघन भूमि हरियारी
ये मृग मृगी पंछिन की श्रवण सुहावै ।
‘ब्रजनिधि’ यह राधा कौ बाग सोही बड़भाग
जो या सों अनुराग करि याही के गुन गावै ॥ [2]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (112)
श्री वृंदावन धाम की समानता केवल वृंदावन धाम ही कर सकता है जहां यमुना का मनोहर पुलिन है, जहां सुंदर वंशीवट है जहां श्री कृष्ण ने मुरली बजाई थी । [1]
जहां के वृक्ष सघन हैं एवं भूमि में हरियाली छाई हुई है जहां के मृग पक्षी आदि मधुर ध्वनि करते हैं । श्री ब्रजनिधि जी कहते हैं कि यह वृंदावन तो श्री राधा का ही बाग है, अत: वही बड़भागी जीव केवल वही है जो वृंदावन से अनुराग करता है और वृंदावन का ही गुणगान करता है । [2]

