दूलह श्री वृषभानकुमारी दुलहिन श्यामल गात जू - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (111.4)

दूलह श्री वृषभानकुमारी दुलहिन श्यामल गात जू - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (111.4)

दूलह श्री वृषभानकुमारी, दुलहिन श्यामल गात जू ।
सेज सुदेस रुचिर बैंदी पर, निरखि निरखि मुसिकात जू ॥

- श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (111.4)

श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि सहचरियों का पतिव्रत-धर्म श्री कृष्ण में नहीं, श्री राधा में है। उनकी दृष्टि में श्री राधिका दूल्हा हैं और श्यामल गात जू दुल्हन, जो मनोहर सेज पर विराजमान हैं। मुख की बिंदी को देखकर वे बार-बार निहारते हुए प्रसन्न होते हैं।