हिडोरें माई झूले श्रीगिरिवरधारी -  श्री चतुर्भुजदास जी

हिडोरें माई झूले श्रीगिरिवरधारी - श्री चतुर्भुजदास जी

(राग मलार)
हिडोरें माई झूले श्रीगिरिवरधारी ।
वाम भाग वृषभानुनंदिनी पहिरि कसूँभी सारी ॥ [1]
ब्रज जुवती चहुँ दिसि सब ठाढीं निरखि नैननि हारी ।
'चतुर्भुज' प्रभु गिरिधरन लाल संग बाढयो रंग अपारी ॥ [2]

- श्री चतुर्भुजदास जी

हे सखी, आज श्री कृष्ण झूला झूल रहे हैं। उनकी बायीं ओर वृषभानुनंदिनी राधिका लाल रंग की साड़ी पहिने सुशोभित हैं । [1]

दिव्य दंपति के चारों ओर ब्रज की युवतियाँ खड़ी हैं और उन्हें देखकर नैनों को वार रही हैं । श्री चतुर्भुज दास कहते हैं कि गिरिधर लाल श्री कृष्ण के संग में नित्य ही अपार रस की वर्षा होती है । [2]