कमलतंतु सो छीद अरु, कठिन खड़ग की धार।
अति सूधो टेढ़ो बहुरि, प्रेमपंथ अनिवार ॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (25)
प्रेम मार्ग एक अनिवार्य रूप से विलक्षण है। यह कमल के तंतु (रेशे) से भी अधिक सूक्ष्म और कोमल है, तो दूसरी ओर तलवार की पैनी धार पर चलने के समान अत्यंत कठिन भी है। यह अत्यंत सीधा भी है और बहुत टेढ़ा भी है।
अति सूधो टेढ़ो बहुरि, प्रेमपंथ अनिवार ॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (25)
प्रेम मार्ग एक अनिवार्य रूप से विलक्षण है। यह कमल के तंतु (रेशे) से भी अधिक सूक्ष्म और कोमल है, तो दूसरी ओर तलवार की पैनी धार पर चलने के समान अत्यंत कठिन भी है। यह अत्यंत सीधा भी है और बहुत टेढ़ा भी है।

